लघुकथा

विश्वास -एक लघुकथा



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जिनके बाहों की गर्मी में छिप कर बड़े हुए हैं आज               काश वे बच्चे समझ पाते हर खुशी का राज                            ना होता इस जहाँ में बृद्धाश्रम,                                             ना ही कोई होता अपनो से वंचित 

एक बूढ़ा आदमी एक गाँव मे रहता था । वह उस गाँव का सबसे बुज़ुर्ग था,उस गाँव की परंपरा थी कि जब भी उस गाँव मे कोई बूढ़ा हो जाता था तब उसे गाँव से निकाल दिया जाता था,उस गाँव मे सिर्फ नवजवान ही रहते थे सब नवजवान पढ़े-लिखे और मेहनती थे,उन्हीं के बीच एक बुद्धिहीन रामलाल भी रहता था,खेतीबाड़ी बड़े दिल और मेहनत से करता था लेकिन दिमाक से थोड़ा ढीला था उसे अपने आस-पास सब अच्छे इंसान ही लगते थे,सब उसका मज़ाक उड़ा कर चले जाते तब भी वो खुश ही रहता था,उसे विश्वास था जो लोग आज उसकी हँसी उड़ाते है एक ना एक दिन उसकी तारीफ जरूर करेंगे ।

समय के साथ उसके पिता भी बूढ़े होते चले गए,अब समय उनको गाँव से निकालने का आ गया,लेकिन रामलाल अपने पिता से बहुत प्यार करता था और उनसे दूर नही होना चाहता थाजब जागो,तभी सवेरा इसलिए उसने एक तरकीब सोची और  उन्हें घर के एक कोने में छिपा दिया,रोज़ खेत जाने से पहले अपने पिता के खाने-पीने और बाकी का इंतजाम करके जाया करता था ताकि किसी कारण वश उन्हें घर से बाहर ना निकलना पड़े समय बीतते देर नहीं लगती ज्यों-त्यों 5वर्ष पूरे हो गए ।

पूरे गाँव मे अकाल पड़ गया बारिश होती तो थी लेकिन टिकती नहीं थी,पूरा गाँव पानी के बून्द-बून्द के लिए तरसने लगा किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था, नौबत गाँव खाली करने की आ गयी रामलाल बहुत परेशान हो गया 😟😓

रामलाल के पिता– “बेटा,क्या हुआ? आज कल तुम बहुत परेशान रहते हो,गाँव में सब कुसलमंगल तो हैं?

रामलाल– नहीं पीता जी,आपसे क्या छिपाना गाँव में अकाल पड़ गया हैं अनाज भी सही से नहीँ होता,बारिश तो होती हैं लेकिन बारिश का पानी टिकता नहीं नौबत गाँव छोड़ कर कही और जाने तक कि आ गयी है !

रामलाल के पिता बड़े गहरे सोच में डूब जाते है …..अंग्रेजी बोलना कैसे सीखें-How to Speak English?

अगली सुबह बूढ़े पिता कहते है कि …. मुसीबत के वक़्त,मुशीबत से भाग जाना कहा कि समझदारी हैं? हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए और मुसीबतों से निकलने का हल निकालना चाहिए ,विश्वास में बड़ी ताकत होती हैं।

रामलाल के पिता- एक काम करो बेटा, लोगो के साथ मिल कर एक बड़ा सा गड्ढा खोदो ताकि उसमे बारिश का पानी रुक सके और एक पाइप के जरीरे उसका पानी कुए तक पहुँचा दो,इससे बारिश का पानी वर्थ नही जाएगा और पानी की समस्या भी हल हो जाएगी ।

रामलाल ने सुबह सबसे यही बात दुहरायी ,सब पहले तो आना कानी करने लगे ,लेकिन दूसरा रास्ता ना मिलने पर राजी हो गए और कुछ समय बाद पानी की समस्या हल हो गयी ,और सब रामलाल की बहुत तारीफ करने लगें, रामलाल का विश्वास आज रंग ला दिया जो लोग उसे बुद्धिहीन समझते थे आज उसकी तारीफ करते  नही थक रहे थे, गाँव के सभी लोग उससे पूछने लगे उसने इतनी समझदारी की बात कैसे की? रामलाल ने सब कुछ सच-सच बता दिया और साथ ही कहा कि हमारे बुजुर्ग हमारे साथ रहेंगे तब ही हमारा भला हो सकेगा यानी मुसीबतों से वे ही हमे बचा सकते है,भले ही बुढ़ापे में वे कमजोर हो जाते है,लेकिन जो शीक्षा, ज्ञान जीवन जीने की सैली वे हमें प्रदान कर सकते है वो कोई औऱ नही कर सकता।

 वहाँ खड़े सभी लोगो को रामलाल पर गर्व महसूस हो रहा था,औऱ अपने किये पर शर्मन्दगी, सभी पढें लिखे नवयुवकों की आँखे शर्म से झुक गयी थी ,आज के बाद से उस गांव से किसी भी बुज़ुर्ग को बाहर निकालने की परंपरा का अंत हो गया ,सब एक साथ रहने गए ।।☺😃☺

रामलाल को विश्वास था एक न एक दिन गाँव वालों की सोच बदलेगी और बुजुर्गों को उनका हक जरूर मिलयेगा,आज उसके इस विश्वास ने लोगो को जीने का एक नया मार्ग प्रदान कर दिया !

 कहानी से सीख:-

*♂ जब पेड़ फल देना बंद कर देता है तब उस पेड़ को हमें काटना नहीं चाहिए क्योंकि वही पेड़ हमें धूप,बारिश से भी बचाता है,उसकी छाव में हम थक के आरम करते हैं।

*♂ बुजुर्गों का सम्मान जिस घर में नही किया जाता वहाँ किसी भी प्रकार की खुशियां नहीँ टिकती।।

 

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