Motivational, लघुकथा

मीठा फल लेकिन जहरीला-लघु कथा

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               हां,सही सुना आपने “मीठा फल लेकिन जहरीला” सुनने में थोडा अजीब है लेकिन कलयुग का हकीकत यही है |

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मंद – मंद ठंडी हवा चल रही थी,बादल गरज रहे थे ऐसा लग रहा था मानो बारिश होने वाली है, श्याम अपने बगीचे में बैठे ढलते सूरज का लुफ्त उठा रहा था इतने में घर के भीतर से आवाज आती है,चाय के साथ नमकीन लोगो की बिस्कुट(श्याम की पत्नी-रिया).

श्याम उचे सव्र में आवाज लगाते हुए कहता है,” नमकीन,बिस्कुट छोडो इस मौसम में पकोड़ी बना दो तो मजा आ जाये”

रिया – मन में बुदबुदाते हुए कहती है, काम-धाम तो कुछ है नहीं,दिन भर घर में पड़े रहते है और जनाब की फरमाईस तो देखो खाने को पकोड़े चाहिए.

श्याम – भाग्यवान,इसी जन्म में मिलयेंगे की अगले जन्म में भीतर से आवाज आती है थोडा सब्र रखो ला रही हु न .

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फ़ोन की घंटी बजती है,”ट्रिन-ट्रिन” (श्याम की माँ का फ़ोन था),जिसे कुछ दिन पहले ही श्याम ने विर्धासर्म के दरसन कराये |

माँ – हेल्लो,बेटा कैसे हो,बहु और मेरे पोता-पोती कैसे है , तुम सब की बड़ी याद आ रही थी एक बार आके मिल लेते तो दिल को थोडा सकून मिलता

श्याम – माँ, कैसे बच्चो जैसी बाते कर रही हो जानती हो न मेरे पास हजारो काम है, एक मिनट तक का फुर्सत(चाय की चुस्की लेते हुए कहता है) नहीं मिलता, और आपसे मिलने कैसे आ जाऊ कह कर फ़ोन काट देता है |

रिया –  सही किये जो मना कर दिया, घर से निकालने के बाद भी बूढी चैन से जीने नहीं दे रही, ना जाने कौनसी परेशानी आन पड़ी है

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अगले दिन फिर से माँ, का फ़ोन आता है इस बार रिया फ़ोन उठाती है और ना जाने कितनी खरी-खोटी सुना के फ़ोन रख देती है,थोड़ी देर बाद एक मेसेज आता है “बेटी,मेरा तुम लोगो के सिवाय इस दुनिया में कोई नहीं है तुम्हारे पिता जि मार्के समय कुछ जमीं-जायदाद मेरे नाम कर गए थे मुझे भूलने की बीमारी है इसलिए याद नहीं था अभी याद आया तो सोचा तुम लोगो को बता के तुम्हारे नाम करा दू , पता नहीं फिर कब भूल जाऊ “   लेकिन लगता है इन चीजो की तुम लोगो को जरुरत नहीं है ,ये सब मै वुर्धास्रम के नाम कर देती हु.

रिया – “बड़ी जोर से चिलाती है,अजी सुनते हो –चलो माँ से मिल कर आते है” अरे सिर्फ मिल के नहीं चलो उनको घर लेकर आते है. रिया के खुसी का ठिकाना नहीं था इधर-उधर उछल कूद रही थी

श्याम- इतनी क्यू नाच रही हो कोई खजाना हाथ लग गया है क्या, अरे मुझे भी तो बताओ

रिया – ये देखो(मेसेज दिखाते हुए बोलती है) तुम तो किसी काम के नहीं हो इतना सब कुछ माँ,के नाम था और तुमने मेरी माँजी को उन बुढो के बिच छोड़ आये हो चलो उनको ले कर आते है .

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( ये सब वाक्या श्याम के बच्चे (बंटी,बबली) देख रहे थे और आपस में बाते भी कर रहे थे हमारे माता-पिता कितने लालची है,अभी दादीजी को ला के सब कुछ उनका ले कर उन्हे फिर से अकेले छोड़ देंगे अब हमे ही कुछ करना होगा )

श्याम बड़े ही प्यार से अपनी माँ को घर लाता है,और रिया माँ की पसंद की ढेरो पकवान बनाती है, प्यारे-प्यारे शब्दों के बाण दोनों के मुह से छुटते ही जाते है ,तभी वकील शाहब घर में दस्तक देते है

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श्याम –  माँ, जो भी तेरे नाम है जल्दी से हमारे नाम करदे और यही रहना हम तेरी खूब सेवा करेंगे मै बस इस लिए ये सब कह रहा हु नहीं तो फिर से सब तू भूल जाएगी

माँ, गहरी सोच में डूबी हुई होती है “कुछ फल खाने में कितने मीठे होते है,लेकिन उनका असर खाने के बाद होता है क्यूकी असल में वो जहरीले होते है” मेरे बच्चे भी उसी मीठे फल की तरह हो गये है जो उपर से तो मीठी-मीठी बाते कर रहे है लेकिन अंदर से एकदम जहरीले,लेकिन है तो मेरे बच्चे ही जहरीले ही सही.

सच कहते है माँ, की ममता अपने बच्चो के लिए कभी कम नहीं होता, चाहे वो निकम्बे ही सही |

   ———————————————–समाप्त———————————————–

  

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