Motivational

जब जागो,तभी सवेरा

       01_02_2013-Womenp

गलती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो,क्षमा माँगने से माफी मिल ही जाती हैं, उसी तरह कितना भी सो क्यों ना लिया हो जागने से एक नई उम्मीद कायम जरूर होती हैं

     ओ भाई अब खोलो आँखे,जरा देश-दुनिया देखो बहुत सो लिया,बहुत खो लिया,अब कुछ करके दिखलाओ,ये समय जो हाथों से निकल जाएगा,फिर न वापस आने वाला कोशते रह जाओगे बुढ़ापे में खुद को जब एक ग्लास भी ना उठाया जाएगा,बहु-बेटे,दामाद-बेटी सब होंगे अपने मे मस्त जो आज किया तुमने कल वापस वही तुम्हे मिल जाएगा, क्यूं बेकार की मोह-माया में फस के युवावस्था बर्बाद कर रहे कुछ अपने सपने पूरे करो,करो कुछ परोपकार, इन बंद आँखों से पट्टी हटाके देखो बाहर एक बार ।।

कहते हैं एक मनुष्य की आँखे जब भी खुल जाए तभी उसके लिए सवेरा हो जाता है वो चाहे आंतरिक हो या बाहरी लेकिन जब तक वो खुद देखना नही चाहेगा तब तक दुनियां की कोई ताकत उसे जगा नहीं सकती ,जिस तरह नींद पूरी होने के बाद ही बाहर की दुनियाँ को देखते है उसी तरह किसी भी काम को तभी पूरा करेंगे जब हम खुद करना चाहेंगे ।

कई लोगों का काम बिगड़ जाने पर वो अपने भाग्य को कोसते है,अपने माहौल अपने परिवार,दोस्तो,अपनी संगति को दोष देते है वे कभी अपने आप को दोषी नहीं ठहराते ,लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती हैं हम कभी झूठ की चादर हटा के जागना ही नहीं चाहते, इंसान दो तरह से ही सोता है …

ब्रम्हा मुहूर्त में (सुबह के समय)

■आंतरिक मन से 

♂  हालांकि ब्रम्हा मुहूर्त जो कि सुबह के 4  से 6 बजे(सूर्य देव के उगने से पूर्व ) तक रहता है, जिसे दिन का दूसरा पहर भी कहते हैं लोगों को जागने की सलाह दी जाती हैं लेकिन इतने व्यस्त जीवन मे अब कोई इतनी जल्दी उठना नही चाहता,हालांकि मैं खुद 8बजे तक उठती हु इसे अच्छाई कहो या बुराई लेकिन जब तक हम नही उठना चाहते तब तक उठ नही सकते।

कुछ EXAMPLE बताना चाहूँगी…..

◆ एक इंसान सोया हो और अपने कमरे में पूरी तरह से अंधकार कर रखा हो,वो ये सोच कर सो रहा है जब सूरज की किरणें उसपर पड़ेंगी तब वो जग जाएगा लेकिन जब किरणों को घर मे प्रवेश करने की जगह ही ना छोड़ी हो तब किरणें अंदर आएंगी कैसे? सूरज तो कब का जग गया है उसे उठाने का प्रयास भी किया लेकिन ये उठना ही नहीं चाहता तो उसमें सूरज का क्या दोष इसी तरह हममें पता नहीं कितने लोग सोते रहते है, ओर औरों को दोष देते रहते है, बिना खुद से प्रयास किए।

◆ दफ्तर जाने के लिए बस मिस हो गईं, हमारे जिंदगी में रिवाइंड का कोई बटन नहीं है इसलिए जो मौका हम खो देते है उसे वापस ला पाना मुश्किल हैअंग्रेजी बोलना कैसे सीखें-How to Speak English? इस जगह भी बस की गलती नही उस इंसान की है जो वहाँ गलत समय पर पहुँचा, बस तो अपने निर्धारित समय पर ही चली गयी।

◆ Exam Time सबसे पहले student उठ जाते हैं पढ़ने के लिए भले ही पूरे साल वो सोते रहे लेकिन एग्जाम टाइम उन्हें कोई सुला ही नही पाता क्यों कि वो खुद सोना नही चाहते ,जगना चाहते हैं? ये मुमकिन तभी है जब हम खुद से जागना चाहे इसलिए कहते है जब जागो तभी सवेरा ये मुहावरा यहाँ सटीक बैठता हैं । Student के लिए एग्जाम टाइम रात भी सुबह के जैसी ही लगती हैं ।


अब बात करते है आंतरिक मन की ….

♂  आंतरिक मन के अभाव के कारण वश ही हमारे आँखों के सामने वो सब गलत काम हो जाते है जिसे समय रहते हम रोक सकते है, किसी को नई जिंदगी दे सकते है तो किसी का घर बचा सकते हैं लेकिन हम ऐसा कुछ भी नहीं करते क्यों कि अभी हमारा आंतरिक मन सोया हुआ है वो उठने को तैयार नहीँ भले ही (चोरी,मार-काट,बलत्कार,दुर्घटना और दिन -दहाड़े हत्या) ये सब हो जाए हम इसमे फसना नही चाहतें।दहेज एक नीच प्रथा😐

  •    आंतरिक मन का सबसे मत्त्वपूर्ण उद्देश्य निर्भरता और बुराई के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस होता हैं लेकिन उसे हम सुला के रखते हैं।
  • एक बुजुर्ग आदमी सोचता हैं मैं क्या कर सकता हूँ? मेरी तो उम्र हो चुकी है वो अपने अंदर के बल को सुला के रखता हैं इसलिए उसे ऐसा अनुभव होता हैं, यदि कुछ काम हम अपने जवानी में नही कर पाते इसका ये मतलब नही उसे हम कभी नही कर सकते जब तक जीवन हैं हम हर एक काम बखूबी कर सकते है जरूरत है बस अपने अन्तरआत्मा को जगाने की  जब जागो तभी सवेरा इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि मनुष्य किसी भी वक़्त अपने आंतरिक मन को जगा के लोगो एवं अपनी भलाई करने के लिए डट के खड़ा हो सकता हैं इसका कोई निश्चित समय नहीं हैं।
  •  सिर्फ आँखे बंद करने से हमारे आंतरिक मन को शान्ति नहीं मिलएगी और ना ही हम खुद शांत हो पाएंगे ,जब तक हमारे ह्रदय पर जो काम,लोभ,अशांति,क्रोध,ईशा और द्वेष जैसे लोग घर किए हुए है इन सबको हमारे आंतरिक मन से बाहर फेंकना होगा तभी हम पूर्ण रूप से जाग सकेंगे और एक नया सवेरा हमारे द्वार पर खड़ा हमारे आंतरिक मन के घर मे प्रवेश करने का इंतजार कर रहा होगा ।
  • हम स्वयं अपने जीवन के लक्ष्य को समझ पाएंगे अब तक क्या खोया क्या पाया है,सिर्फ दुसरो से लेते आए हैं या कुछ परोपकार भी किया हैं ?
  • तो दोस्तो समय आ गया है अपने आंतरिक मन को जगाने का “जब जागो तभी सवेरा” मुहावरा अपने जीवन मे अमल कीजिए औरो को खुश और खुद भी खुश रहिये ☺😇☺

 

मेरी पोस्ट आप सबको कैसी लगी COMMENT,LIKE करके बताना ना भूले और अपने दोस्तों के साथ भी  SHARE करिये । YOUTUBE CHANNEL पर हमसे जुड़े रहने के लिए नीचे दिए लिंक पर CLICK कर अभी SUBSCRIBE करिए👇

♂ SUBSCRIBE MY CHANNEL

https://www.youtube.com/channel/UCSJxcNIXUXysAZZGYF9liRA

 

SHARE THIS POST RIGHT NOW PRESS SHARE ICON👇

5 thoughts on “जब जागो,तभी सवेरा”

Leave a Reply

Your email address will not be published.